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शेयर को कब बेचे

शेयर को कब बेचे
एलीगेटर इंडिकेटर को पहली बार “बिल एम. विलियम्स” द्वारा 1995 में अपनी पुस्तक “ट्रेडिंग चाओस” में दुनिया के सामने प्रस्तुत किया गया था। इस बुक में विलियम्स ने ट्रेडिंग और इन्वेस्टिंग की दुनिया को विस्तृत रूप से समझाया है।

Share Trading Rules: शेयर बाजार के निवेशकों को बड़ी राहत, आज से एक दिन में होगा शेयरों का लेनदेन, शेयर बेचने के अगले दिन खाते में आएंगे पैसे

Stock Exchange Rules: देश के स्टॉक एक्सचेंज बीएसई और एनएसई में शेयरों के लेनदेन के लिए भुगतान की टी प्लस वन प्रणाली ( T+1 system) शुक्रवार 25 फरवरी 2022 से लागू हो गई है.

By: ABP Live | Updated at : 25 Feb 2022 02:20 PM (IST)

Stock Market News: शेयर बाजार ( Stock Market) में निवेश करने वाले निवेशकों को शुक्रवार से बाद से बड़ी राहत मिलने वाली है. शेयर बेचने के बाद अकाउंट में पैसे आने में अब दो दिन नहीं लगेंगे. बल्कि एक दिन में ही खाते में पैसा आ जाएगा तो शेयर खरीदने के अगले ही दिन डिमैट खाते में शेयर ट्रांसफर कर दिए जायेंगे. दरअसल देश के स्टॉक एक्सचेंज मुंबई स्टॉक एक्सचेंज और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज में शेयरों के लेनदेन के लिए भुगतान की टी प्लस वन प्रणाली ( T+1 System) शुक्रवार 25 फरवरी 2022 से लागू हो गई है. टी प्लस वन का मतलब यह है कि लेनदेन से संबंधित सेटलमेंट वास्तविक लेनदेन के एक दिन के भीतर ही अबसे हो जाएगा. मौजूदा समय में सेंटलमेंट का नियम टी प्लस टू है, यानी शेयरों की खरीद-बिक्री की रकम संबंधित खाते में वास्तविक लेनदेन के दो दिनों के भीतर जमा की जा रही है.

क्या है टी प्लस वन
इसे उदाहरण के दौर पर समझते हैं. अगर आपने कोई शेयर बुधवार को खरीदा तो शेयर को कब बेचे आपके डिमैट खाते में शेयर दो दिन बाद शुक्रवार को आता था. उसी तरह आपने बुधवार को शेयर बेचे तो शुक्रवार को उसके एवज में आपको भुगतान किया जाता था और आपके शेयर को कब बेचे खाते में पैसे आते थे. लेकिन अब से बुधवार को आपने शेयर खरीदे से गुरुवार को ही आपके डिमैट खाते में शेयर आ जायेंगे. साथ ही अगर आपने बुधवार को शेयर बेचे तो उसके बदले में पैसे गुरुवार को ही खाते में ट्रांसफर कर दिए जायेंगे.

क्या होगा फायदा
टी प्ल्स वन सेटेलमेंट सिस्टम के लागू होने से डिफॉल्ट का जोखिम कम होगा साथ ही बाजार में नगदी ज्यादा मात्रा में उपलब्ध कराया जा सकेगा. बाजार के जानकारों का मानना है कि इससे निवेशकों की रुचि बढ़ेगी और शेयर बाजार में वॉल्यूम भी बढ़ेगा.

एक्सचेंजों ने लिया था फैसला
बीएसई और नेशनल स्टाक एक्सचेंज (एनएसई) ने पिछले साल नवंबर में इसका ऐलान किया था. तब कहा गया था कि 25 फरवरी 2022 से टी प्लस वन की शुरुआत की जाएगी. सबसे पहले यह व्यवस्था बाजार पूंजीकरण के लिहाज से सबसे छोटी 100 कंपनियों में लागू की जाएगी. उसके बाद मार्च के आखिरी शुक्रवार को इसमें बाजार पूंजीकरण के लिहाज से कम से ज्यादा के क्रम में 500 नए स्टॉक्स शामिल किए जाएंगे. उसके बाद हर महीने के आखिरी शुक्रवार को इसी तरह नए 500 स्टॉक्स तब तक शामिल किए जाते रहेंगे, जब तक सभी स्टॉक्स इसके दायरे में नहीं आ जाते.

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2003 में घटाकर दो दिन कर दिया गया
शेयरों के लेनदेन से हासिल रकम खाते में आने की अवधि पहले वास्तविक लेनदेन से पांच दिनों तक यानी T+5 थी. शेयर बाजार के रेग्युलेटर सेबी ने इसे साल 2002 में घटाकर T+3 किया, जिसके बाद संबंधित शेयरधारक के खाते में बिक्री की रकम तीन दिनों के भीतर आने लगी. बाजार के रेग्युलेटर ने वर्ष 2003 में इसे घटाकर दो दिन कर दिया था. जानकारों का कहना है कि इस नई व्यवस्था से शेयर बाजारो में रकम का आदान-प्रदान तेजी से होगा.

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Published at : 25 Feb 2022 02:16 PM (IST) Tags: NSE bse demat account Stock Exchange Rules Indian Stock Exchange Adopts T+1 settlement What Is T+1 settlement हिंदी समाचार, ब्रेकिंग न्यूज़ हिंदी में सबसे पहले पढ़ें abp News पर। सबसे विश्वसनीय हिंदी न्यूज़ वेबसाइट एबीपी न्यूज़ पर पढ़ें बॉलीवुड, खेल जगत, कोरोना Vaccine से जुड़ी ख़बरें। For more related stories, follow: Business News in Hindi

Share market kya hai|Share baza kya hai

किसी कंपनी का शेर कभी अच्छा रिटर्न देता है। कभी वह नेगेटिव रिटर्न देता है शेयर बाजार में निवेश करने के लिए के पैन कार्ड, डिमैट अकाउंट और स्टॉक ब्रोकर की आवश्यकता होती है, जिसकी मदद से आप शेयर को खरीद और बेच सकते हैं।

आप ने जिस भी कंपनी का शेयर को खरीद है, आप उस कंपनी के हिस्सेदार बन जाते हो, अगर उस कंपनी के शेयर की प्राइस ऊपर जाएगी तो आपका मुनाफे बढ़ेगा अगर कंपनी के शेयर में गिरावट आएगी तो आपका मुनाफा भी घटेगा।

लोग शेयर बाजार में निवेश करने से घबराते हैं, क्योंकि वे इसको जुआ और सट्टे का बाजार समझते हैं जो कि बिल्कुल गलत है। शेयर मार्केट के बारे में लोगो को ज्यादा जानकारी नहीं होती है, और दूसरे के कहने पर निवेश करते हैं।

ताकि वे जल्दी से जल्दी अमीर बन सके जिसके चलते वे जल्दी ही अपना पैसा शेयर बाजार में गवा देते हैं, अगर आप शेयर बाजार को भलीभांति जानते हो और अच्छी तरह रिसर्च करके शेयर की खरीदारी करते हो तो निश्चित तौर पर आप शेयर बाजार में ज्यादा मुनाफा कमा सकते हो, वारेन बफेट जो कि विश्व के पांचवें नंबर के सबसे अमीर आदमी है। जो कि एक शेयर इन्वेस्टर है।

शेयर मार्केट की सही जानकारी हो तो अच्छा पैसा बना सकते हो इसका उदाहरण वारेन बफेट और राकेश झुनझुनवाला है। इसके लिए आपको रिसर्च की आवश्यकता होगी और बाजार के मूड को समझ कर सही शेयर में निवेश करना ही समझदारी होगी शेयर बाजार से संबंधित खबरें बिज़नेस टीवी चैनल और समाचार पत्र से प्राप्त कर सकते है।

शेयर कितने प्रकार के होते हैं

Table of Contents

शेयर मुख्यतः तीन प्रकार के होते हैं

  • इक्विटी शेयर (Equity Share)
  • प्रेफरेंस शेयर (Preference)
  • डीवीआर शेयर (DVR)
स्टॉक एक्सचेंज क्या है

स्टॉक एक्सचेंज जहां से शेयर मार्केट का कारोबार किया जा जाता है स्टॉक एक्सचेंज बाजार की तरह कार्य करता है यहां पर स्टॉक, बॉन्ड और कमोडिटी इत्यादि का कार्य किया जाता है। सेबी( SEBI) के नियमों का पालन करते हुए स्टॉक मार्केट मे व्यापार किया जाता है। शेयर मार्केट में केवल वही कंपनियां व्यापार कर सकते हैं जो इसमें सूचीबद्ध हो। भारत में दो प्रमुख स्टॉक एक्सचेंज है बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज(BSE) और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज(NSE)

बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज(BSE)

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बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज(BSE) की स्थापना 1975 में मुंबई में हुई यो यह स्टॉक एक्सचेंज एशिया महाद्वीप का सबसे पुराना स्टॉक एक्सचेंज है इसमें शेयर को कब बेचे 6000 से अधिक कंपनियां लिस्टेड है।

नेशनल स्टॉक एक्सचेंज(NSE)

नेशनल स्टॉक एक्सचेंज(NSE) की स्थापना 1992 मे मुंबई में हुई। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज को इलेक्ट्रिक एक्सचेंज के तौर पर मान्यता प्राप्त है क्योंकि यह इलेक्ट्रॉनिक ट्रेडिंग वाला एक्सचेंज है। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज(NSE) निफ़्टी 50 के रूप में विख्यात है।

आईपीओ (IPO)क्या है

अगर आप शेयर बाजार में निवेश कर रहे हैं तो आपको आईपीओ के बारे में जानकारी होना आवश्यक आईपीओ का मतलब यह है कि कोई भी कंपनी शेयर बाजार में आने से पहले अपने शेयरों को निजी तौर पर पब्लिक को शेयर करती हैं जब कंपनी अपने शेयर को पहली बार जनता के सामने लाती है। उसे हम IPO कहते हैं। आईपीओ के माध्यम से कंपनी स्टॉक एक्सचेंज में लिस्टेड होती है।

आईपीओ(IPO) क्यों लाया जाता है

किसी भी कंपनी द्वारा आईपीओ(IPO) लाने का मुख्य कारण फंड जुटाना अगर कंपनी अपने बिजनेस को बढ़ना चाहती है। या पहली बार बिजनेस कर रही है तो उसे फंड को आवश्यकता होती है ।

अगर वह बैंक से लोन लेती है तो इससे उसको भारी ब्याज बैंक को देना पड़ेगा इसके बजाय कंपनी शेयर के माध्यम से निवेशकों को लाती है।

जो भी निवेशक शेयर खरीदता है वह कंपनी का हिस्सेदार बन जाता है। जिससे कंपनी को फंड मिल जाता है, और निवेशक को कंपनी में हिस्सेदारी मिल जाती है। इससे निवेशक और कंपनी दोनों को फायदा हो जाता है।

शेयर मार्केट को कैसे सीखें

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आज के समय में शेयर मार्केट को सीखना काफी आसान है कि इसके लिए आपको कहीं जाने की आवश्यकता नहीं है इंटरनेट के माध्यम से आप शेयर बाजार की सभी सवालों के उत्तर आसानी से प्राप्त कर सकते हो क्योंकि इंटरनेट पर आपको काफी जानकारी प्राप्त हो जाती है।

  • शेयर मार्केट का कोर्स कर सकते हो जो कि आपको बारीकी से इसके बारे में जानकारी हासिल कर सकते है।
  • शेयर मार्केट से संबंधित बुक पढ़कर भी आप शेयर मार्केट अच्छा ज्ञान प्राप्त कर सकते हैं जिन से आपको मोटिवेशन मिलता है।
  • सोशल मीडिया मैं भी बहुत से एक्टिव चैनल है जोकि शेयर बाजार से संबंधित जानकारियां शेयर करते हैं तथा यहां पर आपको बहुत सारी फ्री में वीडियो भी मिल जाते हैं जिससे आप शेयर मार्केट की बारीकियों को समझने में आसानी होती है।
  • शेयर बाजार में सफल निवेशकों को फॉलो कर उनकी बताई गई रणनीति को अपना सकते हो।
  • सफल इन्वेस्टर की जीवनी को पढ़ सकते हो जिसे आप को शेयर मार्केट सीखने का मोटिवेशन मिल सके।
  • शेयर मार्केट मे डिमैट अकाउंट खुला कर कम पैसे से निवेश शुरू करें जिससे आपका शेयर मार्केट में अनुभव बढ़ेगा। और आप कुछ सीखने का मौका मिलेगा।

शेयर कैसे खरीदें

शेयर खरीदने के लिए आपके पास एक डीमेट अकाउंट होना आवश्यक है जिसके माध्यम से आप आसानी से शेयर खरीद और बेच सकते हो। शेयर आप Angle broking, up stock और Zrodha से ऑनलाइन खरीद सकते हो।

शेयर खरीदने के लिए आवश्यक डॉक्यूमेंट

  1. पैन कार्ड
  2. आधार कार्ड
  3. बैंक का अकाउंट नंबर
  4. डिमेट अकाउंट

ऑनलाइन शेयर कैसे खरीदें

  • जिस भी स्टॉक ब्रोकर में आपका डिमैट अकाउंट है उसको ओपन करें।
  • सब पहले अपने अकाउंट में फंड ऐड करें ।
  • अपने पसंदीदा शेयर को सर्च बार मैं सच करें उसके बाद आपके शेयर के ऊपर बीएससी और एनएससी एक्सचेंज मैं से किसी को सेलेक्ट करें।
  • अगर आपको लॉन्ग टर्म के शेयर खरीदना है तो डिलीवरी के ऑप्शन को चुने ट्रेडिंग के लिए इंट्राडे को चुने।
  • Buy के ऑप्शन पर क्लिक करें।
  • इस प्रकार केयर सियर आपके पोर्टफोलियो में ऐड हो जाएंगे।
  • क्रिप्टो करेंसी क्या है
  • बिटकॉइन से हिंदी में जानकारी

शेयर कब खरीदे और कब बेचे

शेयर को खरीदने से पहले आपको उस शेयर के बारे में पूरी तरह से रिसर्च कर ले शेयर का 52 week price high rate और 52 week low price rate क्या है।

जब शेयर low price मे Trade कर रहा है उस समय शेयर को खरीद लेना चाहिए ।जब शेयर high price में ट्रेड कर रहा हो तो उसको बेच देना चाहिए, ताकि आप उसके मुनाफे का लाभ उठा सकें इसके अलावा भी आप जिस कंपनी का शेयर को खरीदना चाहते हो शेयर को कब बेचे तो आपको उस कंपनी का फंडामेंटल और टेक्निकल डाटा का पता होना चाहिये।

एक अगस्त से असर: अब शेयर बेचने से पहले भी 20 प्रतिशत देनी होगी मार्जिन, रिटेल निवेशक पर पड़ेगी ज्यादा मार, शेयर बेचने के दो दिन बाद ही खरीद पाएंगे नया स्टॉक

सेबी के नए नियम के कारण अब आप बेचे गए शेयर के पैसे से तभी दूसरा शेयर खरीद पाएंगे जब वह पैसा आपके खाते में दो दिन बाद आएगा - Dainik Bhaskar

पूंजी बाजार नियामक सेबी का काम एक रेगुलेटर के तौर पर निवेशकों की सुरक्षा करना और बाजार को सही तरीके से चलाने का है। लेकिन उसके एक सर्कुलर ने रिटेल निवेशकों की कमर तोड़ दी है। एक अगस्त से अगर आप शेयर बेचेंगे तो आपको इस पर कम से कम 20 प्रतिशत का कैश या शेयरों के गिरवी के रूप में मार्जिन देना होगा। साथ ही आप शेयर बेचने के दो दिन बाद ही नया शेयर खरीद पाएंगे। क्योंकि आप कोई भी शेयर बेचते हैं तो उसका पैसा दो कारोबारी दिनों के बाद आपके खाते में आता है।

नया नियम क्या है?

दरअसल सेबी ने कुछ समय पहले ही एक सर्कुलर जारी किया था। इसके मुताबिक अब हर निवेशक को शेयर बेचने पर भी मार्जिन देना होगा।पहले केवल शेयर खरीदने पर मार्जिन देना होता था। साथ ही अब आप किसी शेयर की बिक्री करते हैं तो उसके पैसे से शेयर दो दिन बाद ही खरीद सकते हैं।

नए नियम का असर किस पर होगा?

सेबी के इस नियम ने ब्रोकर्स हाउस के साथ-साथ रिटेल निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। रिटेल निवेशक इसलिए ज्यादा प्रभावित होंगे क्योंकि उनके पास मार्जिन के लिए पैसे जुटाना मुश्किल है। इससे बाजार में नए और पुराने निवेशकों पर मार पड़ेगी।

कैसे असर होगा?

उदाहरण के तौर पर मान लीजिए किसी ने सोमवार को 100 रुपए का शेयर बेचा। अब उसे इसे बेचने से पहले 20 रुपए का कैश मार्जिन एक्सचेंज को देना होगा। जब तक वह इस मार्जिन को नहीं देगा, तब तक शेयर नहीं बेच पाएगा। दूसरा पहले यह था कि आपने आज शेयर बेचा और आज ही दूसरा शेयर खरीद लीजिए। इसमें बिक्री से मिले पैसे को सेटल कर दिया जाता था।

फायदा किसको हो सकता है?

वैसे कुछ सूत्रों का कहना है कि बाजार में जिस तरह से डायरेक्ट निवेशक आ रहे थे, उससे म्यूचुअल फंड को ज्यादा घाटा हो रहा था। हाल में म्यूचुअल फंड से काफी पैसा निवेशकों ने निकाला है। माना जा रहा है कि इस फैसले से म्यूचुअल फंड को ज्यादा फायदा होगा।

ब्रोकर और मार्केट क्या कह रहा है?

इन लोगों का कहना है कि यह पूरी तरह से निवेशकों के विरोध में नियम है। अगर मेरे पास 100 रुपए की पहले से ही कोई चीज है। आप बोलिए कि पहले 20 रुपए दो फिर बेचो। ऐसा कैसे हो सकता है? मेरे पास जब 100 रुपए है तो यह तो खुद ही सुरक्षा के रूप में है। इन लोगों का कहना है कि इसमें ज्यादा बड़े पैसों पर मार्जिन लगाई जा सकती है ताकि रिटेल निवेशकों को दिक्कत न हो।

मेरे पास अगर 20 रुपए नहीं होगा तो मै क्या करूंगा? शेयर ही नहीं बेचूंगा और जब तक शेयर नहीं बेचूंगा दूसरा खरीद नहीं पाऊंगा। इससे निवेशक बाजार में आएंगे ही नहीं।

Alligator Indicator in Hindi

शेयर बाजार में ट्रेडिंग करने के शेयर को कब बेचे लिए कई तरह के टेक्निकल इंडिकेटर प्रदान किए जाते है तो आपको मार्केट के ट्रेंड और अलग-अलग मार्केट मूवमेंट का संकेत देते है । आज इस लेख में ऐसे ही एक इंडिकेटर alligator indicator in hindi में विस्तार में बात करेंगे।

एलीगेटर का नाम सुनकर आपके दिमाग में जानवर की पिक्चर बन रही होगी लेकिन उसे जानवर के मुँह, जबड़े की तरह का आकर शेयर को कब बेचे जब शेयर मार्केट चार्ट में बनता है तो वह आपको आने वाले ट्रेंड और प्राइस की जानकारी प्रदान करता है ।

एलीगेटर इंडिकेटर

एलीगेटर इंडिकेटर को पहली बार “बिल एम. विलियम्स” द्वारा 1995 में अपनी पुस्तक “ट्रेडिंग चाओस” में दुनिया के सामने प्रस्तुत किया गया था। इस बुक में विलियम्स ने ट्रेडिंग और इन्वेस्टिंग की दुनिया को विस्तृत रूप से समझाया है।

बिल विलियम्स ने एलीगेटर इंडिकेटर के अलावा, Accelerator/Decelerator Oscillator, Awesome Oscillator, Fractals Indicator, Gator oscillator जैसे इंडियकटर्स को दुनिया के सामने पेश किया था।

एलीगेटर इंडिकेटर का परिचय

अपनी सर्च से विलियम्स ने पाया की मार्केट में ट्रेंड सिर्फ 20% से 30% समय के लिए ही होता है और 70% से 80% के लिए मार्केट sideways यानी चोप्पी रहती है। इसीलिए उन्होंने एलीगेटर इंडिकेटर को प्रस्तुत किया जो आपको यह समझने में मदद करता है की बाज़ार ट्रेंड की स्थिति है या sideways, जिससे आप टेक्निकल एनालिसिस (technical analysis in hindi) कर ट्रेड करने की सही पोजीशन ले सकते है। इसका नाम एलीगेटर भी इसलिए रखा गया क्योंकि एक घड़ियाल काफी समय तक शांत रहता है और भूख लगने पर मुँह खोलता है।

ये तो पता चल गया की ये इंडिकेटर आपको आने वाले ट्रेंड की जानकारी देता है लेकिन ये किस तरह से बनता और इसको कैलकुलेट कैसे किया जाता है । एलीगेटर इंडिकेटर में तीन मूविंग रेखाएं होती है, जिन्हें जबड़ा, दांत और होंठ कहा जाता है।

  • जबड़ा: ये 13-पीरियड मूविंग एवरेज के डेटा से बनाया गया है और चार्ट पर ब्लू लाइन का प्रयोग करके दर्शाया जाता है।
  • दांत: रेड लाइन से ये आपको 8-पीरियड के मूविंग एवरेज की जानकारी प्रदान करता है।
  • होंठ: 5-पीरियड का मूविंग एवरेज जो ग्रीन लाइन से दिखाया जाता है।

ये तीनो लाइन आपको मार्केट के बारे में काफी जानकारी देता है और अक्सर ट्रेडर को एक सही प्राइस में ट्रेड करने में लाभदायक होता है ।

एलिगेटर इंडिकेटर का उपयोग कैसे करते है

एक जानवर के भाँती इस इंडिकेटर में तीन तरह के संकेत होते है जिससे स्लीपिंग, जागृत और भूखा इंडिकेटर का नाम दिया गया है । अब इसका तातपर्य क्या है उसके बारे में नीचे दिया गया है:

स्लीपिंग एलीगेटर

स्लीपिंग एलीगेटर का मतलब होता है की एलिगेटर अभी कोई भी प्रतिक्रिया नहीं कर रहा है। जब एलीगेटर कोई प्रतिक्रिया नहीं करता तब लाल , हरी और नीली रेखाएं एक दूसरे के बिल्कुल पास होती है या आपस में जुडी होती है तो उस समय मार्केट में अपट्रेंड और डाउनट्रेंड का अभाव होता है। इस तरह की स्थिति को चोप्पी मार्केट भी कहा जाता है।

जागृत एलीगेटर

जागृत एलिगेटर का मतलब है की एलीगेटर अब उठ गया है और अब कोई प्रतिक्रिया करेगा इसीलिए जब लाल और नीली मूविंग रेखाएं एक ही दिशा में बढ़ती है और हरी मूविंग रेखा उनके बीच से होकर गुजरती है तो इससे यह पता चलता है की मार्केट में अब ट्रेंड बनने वाला है। यह ट्रेंड ऊपर की ओर भी जा सकता है और नीचे की तरफ भी जा सकता है।

भूखा एलीगेटर

भूखे एलिगेटर का मतलब है की एलिगेटर को भूख लगी है और अब शिकार करने के लिए अपना मुँह खोलेगा। ऐसी स्थिति में हरी रेखा , लाल रेखा के ऊपर मूव होती है और लाल रेखा नीली रेखा के ऊपर होती है तो मार्केट में अपट्रेंड शुरू हो जाता है।

लेकिन जब इन रेखाओं का क्रम उल्टा हो जाता है तो मार्केट में डाउनट्रेंड शुरू हो जाता है।

एलिगेटर इंडिकेटर से शेयरों को खरीदना और बेचना

एलीगेटर इंडिकेटर से निवेशक मार्केट में शेयरों को खरीदने और बेचने के लिए संकेत की सहायता लेते है।

शेयर कब ख़रीदे : जब एलीगेटर जागता है तो शिकार के लिए अपना मुँह खोलता है। जब एलीगेटर अपना मुँह खोलता है तो चार्ट में सभी रेखाएं अलग-अलग हो जाती है।

जब हरी लाइन, लाल रेखा के ऊपर और लाल रेखा नीली मूविंग एवरेज से ऊपर आती है तो मार्केट में अपट्रेंड शुरू शेयर को कब बेचे होने लगता है। जिसका मतलब है की आप अभी शेयर को खरीद सकते है।

शेयर कब बेचे : जब एलीगेटर इंडिकेटर में हरी रेखा ,लाल रेखा और नीली रेखा के नीचे होती है तो उस समय आपको अपने शेयरों को बेच देना चाहिए। क्योंकि उस समय मार्केट sideways की स्थिति में चली जाती है।

शेयर कब होल्ड करे: जब तीनो रेखाएं एक दूसरे के काफी नज़दीक होती है तो उस समय किसी भी तरह का निर्णय नहीं लेना चाहिए और अगर आपने स्टॉक ख़रीदा हुआ है तो इस समय उसे बेचने का निर्णय नहीं लेना चाहिए ।

निष्कर्ष

आशा करते है की यह लेख आपको (alligator indicator in hindi) एलिगेटर इंडिकेटर को में समझने में आपकी मदद करेगा। एलीगेटर इंडिक्टर क्योंकि कम समय वाले चार्ट में एक सही संकेत नहीं देता है इसलिए इंट्राडे ट्रेडर्स के लिए लाभदायक नहीं होता है । तो अगर आप स्विंग या पोसिशनल ट्रेड करना चाह रहे है तो इस इंडिकेटर का इस्तेमाल कर मार्केट में एक सही निर्णय ले सकते है।

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